Saturday, December 9, 2017

भारत की पहली महिला फोटोग्राफर ‘होमी व्यारावाला’

होमी व्यारावाला
दिसंबर 1913 में मुंबई में एक गुजराती पारसी परिवार में जन्मी व्यारावाला ने 1930 में अपने फोटोग्राफी करियर की शुरुआत की थी. यह वह दौर था जब कैमरा किसी अजूबे से कम नहीं था. एक रुड़ीवादी परिवार में जन्म लेने वाली एक महिला का फोटोग्राफी के क्षेत्र में करियर बनाना किसी आश्चर्य से कम नहीं था लेकिन होमी व्यारावाला ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए न सिर्फ अच्छी फोटोग्राफी की बल्कि अपने बेमिसाल काम करते हुए भारत की पहली महिला फोटोग्राफर होने का गौरव प्राप्त किया और इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया. उन्होंने पहले-पहल अपने मित्र मानेकशां व्यारवाला से तथा बाद में जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से फोटोग्राफी सीखी।
होमी व्यारावाला द्वारा ली गयी सिगरेट पीते नेहरु की तस्वीर
होमी व्यारावाला ने अपनी बेमिसाल तस्वीरों के माध्यम से भारत के बदलते  सामाजिक तथा राजनैतिक जीवन को खूबसूरती से दर्शाया। उनकी तस्वीरों में उस समय के चर्चित राजनेताओं से लेकर धर्मगुरुओं तक का एक अलग रूप देखने को मिलता है.  उन्होंने जवाहर लाल नेहरूमहात्मा गाँधीलार्ड माउन्टवेटन व दलाई लामा की बेमिसाल तस्वीरें खींची. उनके द्वारा लिए  गए चित्र भारत की स्वतंत्रता से पहले तथा स्वतंत्र के बाद की कहानी वयां करते हैं. उनकी तस्वीरों में हमें इतिहास की झलक मिलती है. भारत की आज़ादी के अगले दिन 16 अगस्त 1947 को लाल किले पर पहली बार फहराये गये झंडेसिगरेट पीते हुए जवाहरलाल नेहरू जो नेहरू की एक अलग छवि को दर्शाती हैलार्ड माउन्टबेटन के साथ अंग्रेजों का भारत छोड़नामहात्मा गाँधीजवाहर लाल नेहरु और लाल बहादुर शास्त्री की अंतिम यात्रा के भी चित्र लिए. व्यरावाला की पहली तस्‍वीर बॉम्बे क्रोनिकल में प्रकाशित हुई थी.
होमी व्यारावाला द्वारा ली गयी नेहरु की अनोखी तस्वीर
वह अपने पति के साथ दिल्‍ली आ गई और ब्रिटिश सूचना सेवाओं के कर्मचारी के रूप में स्‍वतंत्रता के दौर के फोटो लिए. दिूतीय विश्‍व युद्ध के बादउन्‍होंने इलेस्‍ट्रेटिड वीकली ऑफ इंडिया मैगजीन के लिए 1970 तक कार्य किया. उनके कई फोटोग्राफ टाईमलाईफदि ब्‍लेक स्‍टार तथा कई अन्‍य अन्‍तरराष्‍ट्रीय प्रकाशनों में फोटो-कहानियों के रूप में प्रकाशित हुए. ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें लेने में उन्हें महारत हासिल थी. व्‍यारवाला का पसन्‍दीदा विषय जवाहर लाल नेहरू थे। वे फोटो ग्राफर के लिए उन्‍हें उपयुक्‍त छवि मानती थीं। उनके कई फोटोग्राफ ‘’डालडा 13’’ के अंतर्गत प्रकाशित किए गए थे। यह नाम उन्हें कैसे मिला इसका उन्होंने बड़ा ही दिलचस्प कारण बताया थाउनका कहना था की 13 नम्बर उनके लिए लकी है 1913 में उनका जन्‍म होना, 13वें में उनकी शादी होना और उनकी कार की नम्‍बर प्‍लेट डीएलडी 13’ थीइसलिए उनके साथी फोटोग्राफर डालडा 13’ बुलाने लगे थे.
1970 में पति के निधन के बाद उन्‍होंने फोटोग्राफी छोड़ दी थी. वर्ष 2011 में उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पदम् विभूषण पुरस्‍कार से नवाजा गया। 15 जनवरी 2012 को गुजरात के बड़ोदरा में भारत की पहली महिला एवं महान फोटोग्राफर का निधन हो गया.